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हाई-वे पर जाम में फंसा रहा पूर्व मंत्री शिवपाल का काफिलाहाई-वे पर जाम में फंसा रहा पूर्व मंत्री शिवपाल का काफिला फर्रुखाबाद:(मोहम्मदाबाद) सत्ता की शक्ति से कौन अंजान है और खास कर वो तो बिल्कुल भी नही जो सत्ता का सुख एक लम्बे समय तक ले चुका हो| लेकिन कुर्सी पर ना रहने के बाद नेता को सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता है| यही नजारा देखने को मिला जब शिवपाल सिंह का काफिला लगभग 20 मिनट तक जाम की झाम में...

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बसपा प्रत्याशी वत्सला को महान दल का समर्थनबसपा प्रत्याशी वत्सला को महान दल का समर्थन फर्रूखाबाद: नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिये बहुजन समाज पार्टी की प्रत्याशी वत्सला अग्रवाल को महान दल ने अपना समर्थन दे तेजी से चुनाव लड़ाने का ऐलान किया है |जिससे वत्सला के खेमे में मजबूती आ गयी है| महान दल के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने रेलवे रोड स्थित बसपा प्रत्याशी के चुनाव...

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नही खुला विशाल की मौत का राज, आखिर कैसे हुई मौत?नही खुला विशाल की मौत का राज, आखिर कैसे हुई मौत? फर्रुखाबाद: बीती रात बाइक चोरी के आरोप में पकड़े गये आरोपी की मौत का राज फ़िलहाल पोस्टमार्टम में भी नही खुल सका| जिससे उसकी मौत की गुत्थी उलझ गयी है| वही पुलिस मामले की जाँच कर रही है| थाना राजेपुर के बमियारी रामपुर निवासी विशाल पाठक पुत्र चन्द्रमोहन पाठक उर्फ़ रामू को बाइक...

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योगी की पुलिस से परेशान महिलाओं ने पकड़े मंत्री के पैरयोगी की पुलिस से परेशान महिलाओं ने पकड़े मंत्री के पैर फर्रुखाबाद: बीते दिनों शराब ठेके पर पुलिस व ग्रामीणों के साथ हुई हिंसक झड़प के बाद पुलिस ने कई को आरोपी बनाया था| जिसको पकड़ने के लिये पुलिस लगातार हाथ-पैर मार रही है |जिस पर अब राजनितिक रंग चढ़ गया है| पुलिस के खौफ से खफा महिलाओ ने राज्य मंत्री के पैर पकड़कर न्याय की मांग की है|...

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चुनावी बिसात पर हर रोज बदलती सियासी चालचुनावी बिसात पर हर रोज बदलती सियासी चाल फर्रुखाबाद:चुनावी रण का धीरे-धीरे रुख बदल रहा है और सियासी लोगों की रणनीति भी। नुक्कड़ सभाओं और जनसम्पर्क के साथ-साथ अब दूसरा दौर शुरू हो गया है। सियासी बिसात पर पल-पल की खुफिया निगरानी के बाद शतरंजी चालें चली जा रही हैं। कोई पूरे पालिका व नगर पंचायत क्षेत्र में मोहल्ले-मोहल्ले...

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अध्यक्ष पद के आधा दर्जन नामांकन वापसअध्यक्ष पद के आधा दर्जन नामांकन वापस फर्रुखाबाद: शुक्रवार को नामांकन के वापसी के दौरान फर्रुखाबाद, मोहम्मदाबाद व कमालगंज के कुल आधा दर्जन प्रत्याशियों ने अपना नामांकन वापस कर लिया| फर्रुखाबाद नगर पालिका से निर्दलीय प्रत्याशी सुधांशु दत्त द्विवेदी, कपड़ा व्यापारी किशन कन्हैया सक्सेन व आभा सिंह ने अपना...

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सभासद पद के 16 के नामांकन वापससभासद पद के 16 के नामांकन वापस फर्रुखाबाद: नगरिया निकाय चुनाव में फर्रुखाबाद, कमालगंज व मोहम्मदाबाद में से सर्वाधिक सदस्यों ने फर्रुखाबाद के वार्डो से पर्चा वापस कर लिया| जिससे कई प्रत्याशियों के समीकरण बने तो कई का सियासी गणित बिगड़ गया| फर्रुखाबाद नगर पालिका में वार्ड 28 से आरती, वार्ड 31 से नजरीन, वार्ड...

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फ़्लैश बैक: काला धन खपाने के लिए एक डॉक्टर ने खरीदे थे 13 एसी, 5 एलईडी और ....फ़्लैश बैक: काला धन खपाने के लिए एक डॉक्टर ने खरीदे थे 13 एसी, 5... फर्रुखाबाद: नोटबंदी का एक साल पूरा हुआ, कहीं जश्न मना तो किसी के जख्म हरे हुए| 8 नवम्बर 2016 वो दिन है जो इतिहास बन गया| रात 8 बजे उस दिन दफ्तर में सामान्य कार्य में लगा था कि 5 मिनट बाद ही जूनियर ने फोन पर बताया कि 500 का नोट बंद हो गया| किसी बात को एक बार में ही न मानने की आदत पत्रकार...

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भगवान बुद्ध ने देश का नाम किया रोशन

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फर्रुखाबाद:(कंपिल) कस्बे के केएसआर इंटर कालेज में बुद्ध जयंती समारोह के कार्यक्रम में आये मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि भगवान बुद्ध ने देश का नाम पूरे विश्व में रोशन किया|
कार्यक्रम का शुभारम्भ करने के बाद समर्थको ने उनका जोरदार स्वागत किया| लगभग दो घंटे बिलम्ब से पंहुचे स्वामी प्रसाद ने कहा कि हम सभी को भगवान बुद्ध के बताये रास्ते पर चलना चाहिए| उन्होंने देश का नाम पूरे विश्व में रोशन किया | आज भी विदेशो में खुदाई होती है तो वहां भगवान बुद्ध की प्रतिमा निकलती है| इसके साथ ही उन्होंने सरकार की उपलब्धियों को भी जनता के बीच रखा| कताई मिल श्रमिक संघ ने श्रमिको का बकाया वेतन उपलब्ध कराये जाने की शिकायत की| पीआरडी संघ ने भी मंत्री को समस्याओं से अबगत कराया|
विधायक सुशील शाक्य, अमर सिंह खटिक, प्रो० शैतान सिंह शाक्य, कर्मवीर शाक्य, सुधीर शाक्य, सुग्रीब शाक्य आदि मौजूद रहे|

ब्रह्मदत्त की मौत का कोलाहल- जिंदाबाद की जगह अमर रहे के नारे ने पैदा कर दी थी सिहरन..

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Posted on : 26-05-2017 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, FEATURED, Politics, Politics-BJP

फर्रुखाबाद: “मौत स्वाभाविक होनी चाहिए| ऐसा नहीं होना चाहिए कि बड़ा भाई बैठा रहे और छोटा भाई चला जाए| द्विवेदी जी की मौत स्वाभाविक नहीं थी| अभी उनकी उम्र ही क्या थी| स्वस्थ शरीर| शांत स्वभाव और दबंग व्यक्तित्व| अभी उन्हें कई मैदान मारने थे| अभी कई लड़ाई जीतनी थी| कई किले फ़तेह करने थे|” बोलते बोलते पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की आँखे नम हो गयी| नगर की जिस सड़क और गलियो में ब्रह्मदत्त द्विवेदी जिंदाबाद के नारे लगते थे एक काली रात में सब कुछ बदल गया| किराना बाजार से लेकर लालगेट तक सड़के इंसानो और इंसानियत से भरी हुई थी और ब्रह्मदत्त द्विवेदी अमर रहे के नारो के सिवा दूसरी न कोई आवाज न कोई शोर…
20 साल पहले 10 फरवरी 1997 को सुबह 9 बजे द्विवेदी जी का शव उनके सेनापति स्ट्रीट स्थित आवास से खुली जिप्सी पर रखकर लोहाई रोड पर भारतीय पाठशाला में अंतिम दर्शनार्थ लाने के लिए लाया गया| प्रेमलता कटियार एक हाथ से बार बार गाड़ी में शांत लेटे द्विवेदी जी का हाथ छू रही थी तो दूसरे हाथ से निरंतर झर रहे नेत्रो को साफ़ कर रही थी| बागीश अग्निहोत्री जिप्सी के आगे रास्ता बना रहे थे| गली के इस ओर से उस छोर तक और सड़क से लेकर छतो और छज्जो पर खड़े होकर जनता द्विवेदी जी को अंतिम विदाई दे रही थी| नगर में पीएसी तैनात कर दी गयी थी| 5 ट्रक पीएसी ने चौक से लालगेट को कब्जे में ले लिया था| मगर न किसी को हटाने की जरुरत थी और न रास्ता साफ़ करने की| सब बात इशारो इशारो में हो रही थी| आधे घंटे में शव सेनापति स्ट्रीट से लोहाई रोड की भारतीय पाठशाला पहुच सका|
भारतीय पाठशाला के प्रांगण के बीचो बीच टेंट की एक छत तानी गयी थी| तखत पर द्विवेदी जी का शव रखा था| पीले गेंदे और लाल गुलाब से ढका हुआ| फूल मालाये ज्यादा हो जाती तो कुछ उतार दी जाती| अंतिम दर्शन के लिए यहीं पर अटल बिहारी बाजपेयी, मुरली मनोहर जोशी और लालकृष्ण अडवाणी एक ही हेलीकाप्टर से आये थे| पुलिस लाइन से भाजपा के तीनो दिग्गज नेता भारतीय पाठशाला पहुचे| सीढ़ियों से पैदल चलते हुए प्रांगण तक पहुचते पहुचते अटल जी की आँखे नम हो चुकी थी| साथ के सुरक्षा कर्मी ने उन्हें रुमाल थमाया| तीनो नेताओ ने पुष्प चक्र द्विवेदी जी को अर्पित किया| कैमरामेन कई कुर्सियों पर खड़े होकर वो अंतिम दृश्य अपने कैमेरे में कैद कर लेना चाहते थे| फोटोग्राफर मुकेश शुक्ल कैमेरे बदल बदल कर फ़ोटो खीच रहे थे| उस ज़माने में रील वाले कैमेरे होते थे| एक कैमेरे की रील ख़त्म हो जाती तब तक सहयोगी दूसरे कैमेरे में रील डाल कर कैमेरा दे देता| लोग अंतिम दर्शन में आते, द्विवेदी जी को प्रणाम करते और हट जाते दूसरो को मौका देने के लिए| कई घंटे तक ये सिलसिला चला और फिर अंतिम यात्रा शुरू हुई|
जब मौत के दरवाजे के आगे से द्विवेदी जी का शवयात्रा गुजारी तो हर एक की निगाह उस स्थान पर एक बार गयी जहाँ द्विवेदी जी को मौत के घाट उतार दिया गया था| उस मकान में सजे हुए गेंदे के फूल द्विवेदी जी के साथ ही मुरझा चुके थे| कल तक जो फूल अपने मेहमानो के स्वागत के लिए सजाये गए थे आज वे अंतिम विदाई दे रहे थे| नाले मच्छरट्टे से चौक और चौक से लालगेट की तरफ केवल एक तरफ ही आवागमन हो रहा था| अंतिम यात्रा में रास्ते एकतरफा हो चले थे| कोई एक आदमी भी सड़को पर दूसरी तरफ से वापस नहीं चल रहा था|
इतिहास में पहली बार था जब सुरक्षा व्यस्था अब प्रदेश के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी डीजीपी हरिदास राव खुद सम्भाले हुए थे| क्या कांग्रेसी, क्या बसपाई कोई तो नहीं था जो दिखा न हो उस अंतिम यात्रा में| किस किस का नाम लिखा जाए| कुछ चंद लोगो को छोड़कर| राजनैतिक रूप से विरोध करने वाले भी हैरान थे| व्यापारियो ने बाजार नहीं खोला| बंद दुकाने मनो अपने नेता को श्रद्धांजलि दे रही हो| अनायास हुई हत्या पर स्तब्ध था फर्रुखाबाद| किसने की हत्या? क्यों की हत्या? और कैसे हुई हत्या? इन सभी सवालो का जबाब एक ख़ामोशी थी जो अंतिम यात्रा के रूप में शांत गाड़ी पर लेटी हुई थी…..और रास्ते भर नारे लग रहे थे– जब तक सूरज चांद रहेगा, ब्रह्मदत्त जी का नाम रहेगा….

उस स्याह रात का मंजर जब हत्यारो ने मौत के घाट उतार दिया ब्रह्मदत्त द्विवेदी को

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Posted on : 26-05-2017 | By : JNI-Desk | In : CRIME, EDITORIALS, FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics-BJP

फर्रुखाबाद: प्रदेश में राष्ट्रपति शासन था| रोमेश भंडारी राज्यपाल थे| बसपा और भाजपा में 6-6 महीने मुख्यमंत्री बनाकर सरकार बनाने के फार्मूले पर लखनऊ में बैठको का दौर चल रहा था| फार्मूले की अगुआई स्व ब्रह्मदत्त द्विवेदी कर रहे थे| वही समझौते का फार्मूला लेकर मायावती के पास आ-जा रहे थे| बताते है कि मायावती सिर्फ एक शर्त पर इस फार्मूले पर राजी थी कि भाजपा की पारी में सिर्फ ब्रह्मदत्त द्विवेदी मुख्यमंत्री बने| कल्याण सिंह के नाम पर मायावती नाक भौ सिकोड़ रही थी| इसी बीच प्रदेश के कद्दावर भाजपा नेता की हत्या कर दी गयी| पक्ष हो या विपक्ष जनता भी मानती है कि अगर ब्रह्मदत्त द्विवेदी आज जिन्दा होते तो फर्रुखाबाद की विकास के रास्ते पर चलते हुए तस्वीर ही बदल जाती| मगर समय और नियति के आगे किसी की नहीं चलती| 17 साल बीत जाने के बाद भी याद करने पर उस काली रात का मंजर दिलो में सिहरन पैदा कर देता है|

लोहाई रोड के जिस मकान के बाहर ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या हुई थी वहाँ हर साल 10 फरवरी को उनकी याद में पुष्पांजलि और मशाल जलती है| अपने दोस्त रामजी अग्रवाल के भतीजे के तिलक में शामिल होने के लिए द्विवेदी पहुचे थे| एक गनर ब्रजकिशोर मिश्र और ड्राइवर के साथ| लगभग 11.30 से 12 बजे के बीच का समय था| सर्दी की रात में कार्यक्रम समापन की और हो चला था| द्विवेदी जी वापस घर जाने के लिए निकले ऊँचे मकान की सीड़ियो से उतरने के बाद अपनी कार तक पहुचे| खिड़की खोल कर बैठ गए| कार के शीशे खुले हुए थे| रामजी अग्रवाल उनका भतीजा और परिवार के अन्य सदस्य अपने मकान के गेट तक उन्हें छोड़ने के लिए आये थे और उनकी गाड़ी के रवाना होने का इन्तजार कर रहे थे| गनर गाड़ी के बाहर खड़ा था| तभी उनकी कार के चारो और से घेर कर फायरिंग होने लगी| लाबड़तोड़ गोलियां चली| ब्रह्मदत्त द्विवेदी और गनर बृजकिशोर सहित ड्राईवर और रामजी अग्रवाल के भतीजे के भी गोली लगी| बताते है कि दरवाजे पर खड़े लोग अपनी जान बचाने को घर में छुप गए| सड़क पर सन्नाटा हो गया| ऊपरी मंजिल की बालकनी या छत पर खड़े मनोज अग्रवाल ने अपनी पिस्तौल निकाल गोली चलाई| ऊंचाई और दूरी के कारण शायद पिस्तौल स्वचालित हथियारो के आगे नाकाम साबित हो रही थी| मगर फिर भी हिम्मत की गयी| मगर सब बेकार गया| दुर्दांत हत्यारे अपने मकसद में कामयाब हो गए| लगभग 20 से 25 मिनट तक पूरे लोहाई रोड सन्नाटा|

घटना के कुछ समय बीत जाने के बाद आखिर फिर हिम्मत जुटाकर वापस लोग जुटे और रामजी अग्रवाल के भतीजे की टाटा सूमो में द्विवेदी जी को लिटाकर पहले डॉ जितेन्द्र कटियार के नर्सिंग होम जो चंद कदमो कि दूरी पर था वहाँ लाया गया| मगर डॉ जितेन्द्र कटियार का दरवाजा नहीं खुला तो आनन् फानन में बढ़पुर स्थित डॉ एन सी जैन के नर्सिंग होम में लाया गया| जहाँ उन्हें डॉ जैन ने मृत घोषित कर दिया| एक विकास का दिया बुझ चुका था| प्रभुदत्त, सुधांशु, डॉ हरिदत्त कोई कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था| यकीन नहीं कर पा रहा था कि उनका कोई करीबी इस तरह दुनिया से विदा हो जायेगा| गनेश दुबे, सदानंद शुक्ल, स्व बागीश अग्निहोत्री, राम चन्द्र कुशवाहा, मोती लाल गुप्ता, अजय पाराशर, अयोध्या प्रकाश सिंह जैसे तमाम चेहरे जैन अस्पताल के बाहर मौजूद थे| मोबाइल का जमाना नहीं था| बेसिक फोन से जहाँ तक सूचना पहुचती दो चार को लोग बताते और अस्पताल की ओर दौड़ पड़ते| मंजुल दुनिया से विदा हो चुका था| खामोश चेहरा, बंद आँखे और शांत शरीर जीवन के अंतिम पड़ाव की तस्वीर साफ़ थी मगर यकीन फिर भी नहीं हो रहा था| लोग शव देखने के बाद भी इशारो इशारो में एक दूसरे से पूछ कर पुष्टि कर लेना चाहते थे कि क्या उनका नेता क्या बाकई चला गया!

प्रशासन से लेकर पुलिस तक खामोश थी| जिलाधिकारी अरविन्द कुमार, पुलिस अधीक्षक अखिलेश मल्होत्रा, अपर पुलिस अधीक्षक एस एन सिंह, कोतवाल ओपी शर्मा सब डॉ जैन के अस्पताल पहुचे| पुलिस अधीक्षक ने डीजीपी और डीआईजी को सूचना दी| जिलाधिकारी ने फोन पर कमिश्नर कानपुर को द्विवेदी जी की हत्या की सूचना दी| लोग पीसीओ खोजने में लगे थे| सूचना देने के लिए बेसिक फोन तलाश किये जा रहे थे| खबरनवीसों में अखबारो के पत्रकार सक्रिय हो चुके थे| तब टीवी का जमाना नहीं था| रेडियो पर समाचार प्रमोद कुदेसिया ने प्रसारित करवाया| सत्यमोहन पाण्डेय अपने कार्यालय में समाचार भेजने में लगे थे| मगर शहर ख़ामोशी से सो रहा था|
घटना स्थल पर स्वर्गीय द्विवेदी की कार खड़ी थी| पुलिस जांच पड़ताल में लगी थी| रात सुबह की और बढ़ रही थी और भाजपा कार्यकर्ता जैन अस्पताल पहुँच रहे थे| द्विवेदी परिवार के सभी सदस्य यहाँ मौजूद थे| ब्रह्मदत्त द्विवेदी की पत्नी स्व प्रभा द्विवेदी और उनके पुत्र मेजर सुनील द्विवेदी सुबह 4/5 बजे के आसपास लखनऊ से फर्रुखाबाद पहुच चुके थे| दोनों लोग उस दिन लखनऊ में ही थे| हर चेहरा उदास और शांत| कोई कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था| यह पहली बार देखा था जब हर कार्यकर्त्ता दिल से दुखी दिखा|

साक्षी महाराज उस दिन अनन्त होटल में थे| साक्षी महाराज ने राम नगरिया के बड़े क्षेत्र में अपना पंडाल लगाकर उसी दिन भागवत कथा शुरू की थी जिस रात यह घटना हुई| साक्षी जी भी जैन अस्पताल पहुंचे थे| हर शख्स की पूरी रात जागते ही कट गयी और शव पोस्टमार्टम के लिए फतेहगढ़ ले जाया गया| अब रिटायर हो चुके कन्हैया ने ही पोस्ट मार्टम किया था| पोस्टमार्टम हाउस का वह मंजर पहली बार दिखा था| जहाँ धर्म, जाति और दलीय सीमाएं टूट गई थीं| ऐसी भीड़ पहली बार देखी गयी थी| पूरे पोस्टमार्टम के दौरान भीड़ बढ़ती रही| जो आ जाता वो रुक जाता था| साक्षी, उर्मिला भी पहुंचे थे| पोस्टमार्टम के बाद शव को पहले ब्रह्मदत्त द्विवेदी के घर पर लाया गया| उसके बाद दिन में लोगों के अंतिम दर्शनार्थ भारतीय पाठशाला ले जाया गया| ऍफ़आईआर हो चुकी थी| एक नामजद और 3-4 अज्ञात में मुकदमा कोतवाली में लिखा जा चुका था| सुबह दोपहर की और बढ़ रही थी| पूरी भारतीय जनता पार्टी फर्रुखाबाद में पहुच रही थी| पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपयी, लालकृष्ण अडवाणी, विनय कटियार, प्रेमलता कटियार, लालजी टंडन, कलराज मिश्र से लेकर हर नामी भाजपाई चेहरा फर्रुखाबाद पहुच रहा था| मगर मायावती और कल्याण सिंह नयी आये| आम जनता में सुबह जब लोग घर से निकलते तो खबर मिलती और जिसे जैसा साधन मिलता वो सेनापत स्ट्रीट पहुच रहा था| नेहरू रोड उस जमाने में जाम की स्थिति में पहुच चुका था|

असलहों के बीच रहने वाले मेजर को था कानून पर भरोसा

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फर्रुखाबाद: 10 फरवरी 1997 को भाजपा के तत्कालीन बड़े नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी की फर्रुखाबाद में लोहाई रोड स्थित एक समारोह में गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी| उनकी हत्या के बाद से अब तक 20 साल का समय गुजर गया| इस बीच मेजर सुनील दत्त द्विवेदी ने हत्याकांड के आरोपी विजय सिंह को सजा दिलाने के लिये पूरी ताकत लगा दी | वही विजय सिंह को निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा हुई| लेकिन हाई कोर्ट ने सजा को निलंबित कर दिया| लेकिन 20 साल बाद शुक्रवार को लोअर कोर्ट के आजीवन कारावास की सजा के निर्णय पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मुहर लगा दी। और विजय सिंह की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी| मेजर का कहना है कि उन्हें कानून पर पूरा भरोसा था|
विदित है कि ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या के साथ ही साथ उनके गनर बृजकिशोर तिवारी की भी मौत हो गई थी। घटना के सम्बन्ध में ब्रह्मदत्त के भतीजे सुधांशु दत्त द्विवेदी ने मुकदमा दर्ज कराया था| जिसमे घटना की सीबीआई जांच कराई गई। सीबीआई के डिप्टी एसपी वीपी आर्या ने न्यायालय में पूर्व विधायक विजय सिंह व पूर्व विधायक उर्मिला राजपूत एवं उनके पूत्र पंचशील राजपूत के अलावा माफिया संजीव महेश्वरी आदि के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। सीबीआई अदालत के जस्टिस कलीमुल्लाह ने बीते 28 जुलाई 2003 को ब्रह्मदत्त की हत्या के आरोपी कुख्यात शूटर संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा के साथ ही साजिश के मामले में पूर्व विधायक विजय सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने विजय सिंह की सजा को सस्पेंड करके जमानत पर रिहा करने के आदेश जारी किये| जिसके बाद विजय सिंह जेल ने बाहर आ गये| विजय सिंह को सजा दिलाने के लिये ब्रह्मदत्त द्विवेदी के पुत्र मेजर सुनील दत्त द्विवेदी व छोटे पुत्र प्रियांक दत्त द्विवेदी लगातार प्रयास में लगे रहे| विजय सिंह को जेल की सलाखों के पीछे भेजने के लिये मेजर और उनके भाई प्रियांक ने बीस साल संघर्ष किया| लेकिन हिम्मत नही हारी| इस बीच विजय सिंह सदर सीट से तीन बार विधायक चुने गये| आखिर 2017 के चुनाव में मेजर से विजय सिंह को ऐतिहासिक हार दे दी|
मेजर सुनील दत्त द्विवेदी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी| सुप्रीमो कोर्ट ने बीते तीन माह पूर्व सुनबाई करके हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले की दैनिक सुनवाई के आदेश दिये| शुक्रवार को जस्टिस अजय लांबा और जस्टिस डा.विजय लक्ष्मी ने विजय सिंह की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के निर्णय पर मुहर लगा दी।

रजिस्टर में मुंशी व राइफल में संतरी फेल

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Posted on : 26-05-2017 | By : JNI-Desk | In : CRIME, FARRUKHABAD NEWS, POLICE

फर्रुखाबाद:(राजेपुर) एसपी सुभाष सिंह बघेल ने थाने का निरीक्षण किया तो उन्होंने लापरवाह पुलिस कर्मियों की जमकर क्लास लगा दी| उनके सामने दीवान रजिस्टर के विषय में नही बता पाये और मुंशी राइफल नही चला पाये| उन्होंने व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिये|

एसपी ने थाने में सिपाहियों के आवास चेक किये और जल्द नये आवास चालू करने के निर्देश दिये| उन्होंने भवन, गुंडा, समाधान व तहसील रजिस्टर चेक किये| उन्होंने दीवान से आठ नम्बर रजिस्टर के विषय में पूंछा लेकन दीवान नही बता सके| जिस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की| वही संतरी एसपी के सामने राइफल नही खोल पाये| जिस पर उनका पारा चढ़ गया|

उन्होंने असलहो में गंदगी देखकर हेड मोर्रर की फटकार लगा दी| उन्होंने एसओ महेन्द्र त्रिपाठी को व्यवस्था दुरुत्त करने के निर्देश दिये|

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