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सियासी आकाओं की परिक्रमा में जुटे टिकट के दावेदार! फर्रुखाबाद:लोक सभा की चुनावी आहट शुरू होने के साथ ही सियासी सरगर्मियां बढ़ गई है। जिले का सांसद बनने का सपना देखने वाले लोग अपने राजनैतिक आकाओं की परिक्रमा करने में जुट गये है। वैसे तो सपा,भाजपा,बीएसपी आदि के बैनर तले कई लोग चुनाव लड़ने के इच्छुक है मगर सबसे बड़ी फेहरिस्त...

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गणतंत्र की वर्षगांठ का उल्लास,तिरंगे से सजी दुकानेंगणतंत्र की वर्षगांठ का उल्लास,तिरंगे से सजी दुकानें फर्रुखाबाद:गणतंत्र दिवस को लेकर पूरा शहर तिरंगे रंग में रंगा नजर आ रहा है। गणतंत्र दिवस की वर्षगांठ की रौनक शहर में नजर आने लगी है। बड़े व्यवसायियों और ठेली व्यापारियों ने अपनी दुकान तिरंगे, दुपट्टों, मालाओं, पतंगों से रंग दिया है। बाजार में केसरिया, सफेद और हरे रंग से बने...

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जेएनआई विशेष: कुम्भ में बढ़ी फतेहगढ़ सेन्ट्रल जेल के भगवा झोलों की डिमांडजेएनआई विशेष: कुम्भ में बढ़ी फतेहगढ़ सेन्ट्रल जेल के भगवा झोलों... फर्रुखाबाद:(दीपक-शुक्ला)सेन्ट्रल जेल फतेहगढ़ में बनने वाले झोले आदि सामान तो वैसे भी मजबूती के मामले में बेजोड़ माना जाता है| लेकिन आम जनमानस में इसकी खरीददारी को लेकर साधन उपलब्ध नही है| लेकिन इसके बाद भी उसको खरीदने की चाहत लोगों के जगन में रहती है| अब कारोबार कम है लेकिन...

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महिलाओं का प्रतिशत कम देख नोडल अधिकारी खफामहिलाओं का प्रतिशत कम देख नोडल अधिकारी खफा फर्रुखाबाद: अपने निरीक्षण में महिलाओं की संख्या गाँव के पुरूषों से काफी कम देख नोडल अधिकारी खफा हो गये| उन्होंने कहा की सरकार बेटी-बचाओं और बेटी पढाओ पर अपना पूरा जोर दे रही है| लेकिन इस गाँव में पुरुष वर्ग की अपेक्षा महिलाओं का प्रतिशत चिंता का विषय है| उन्होंने अधिकारियों...

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कोटेदारों का खाद्यान्न उठाने से साफ़ इंकारकोटेदारों का खाद्यान्न उठाने से साफ़ इंकार फर्रुखाबाद:अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे जिले के कोटेदारों ने अब राशन उठान ने मना कर आन्दोलन की राह पकड़ ली है| जिसके चलते कोतेदारों ने साफ़ कह दिया की जब तक उनकी मांगो पर विचार नही होगा तब तक वह राशन नही उठायेंगे| नगर के ग्राम चाँदपुर में आयोजित हुई उचितदर विक्रेताओं...

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छुट्टा गोवंश के भरण-पोषण को 78.5 करोड़ की मंजूरीछुट्टा गोवंश के भरण-पोषण को 78.5 करोड़ की मंजूरी लखनऊ:छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए चरागाह की जमीनों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए ग्राम सभा की भूमि प्रबंधक समिति किसी गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) या कॉरपोरेट घराने से अनुबंध कर सकती है। वहीं पशु आश्रय स्थलों की स्थापना चरागाह की जमीन से हटकर अनारक्षित श्रेणी की भूमि...

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सामूहिक बलात्कार के बाद तीन दरिंदों ने उतारा था गोल्डी को मौत के घाटसामूहिक बलात्कार के बाद तीन दरिंदों ने उतारा था गोल्डी को... फर्रुखाबाद:(अमृतपुर)बीते दिन खेत में दुष्कर्म के बाद हत्या किये जाने की घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी थी| घटना के बाद से एसपी ने क्षेत्र में डेरा जमा लिया था| 24 घंटे के भीतर घटना करने के आरोपियों में से दो को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया| जबकि एक फरार आरोपी पर ईनाम भी रखा...

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खास खबर:यह शख्स रोज करता परिंदों की मेहमान नवाजीखास खबर:यह शख्स रोज करता परिंदों की मेहमान नवाजी फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला)ऋषि-मुनि, संत-महात्मा सही कह गए हैं कि पशु-पक्षियों को दाना-पानी खिलाने से मनुष्य के ज‍ीवन में आने वाली कई परेशानियों से छुटकारा बड़ी ही आसानी से मिल जाता है। एक ओर ईश्वर की भक्ति के कृपा पात्र बनते हैं वहीं हमें अच्छे स्वास्थ्य के साथ ही पुण्य-लाभ...

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मिक्सी ने मिस कर दिया सिल-बट्टा के मसालों का स्वादमिक्सी ने मिस कर दिया सिल-बट्टा के मसालों का स्वाद फर्रुखाबाद:(दीपक-शुक्ला)पुराने समय में खाना पकाने के लिए मसाले पीसने के लिए ओखली-मूसल और सिल बट्टा का इस्तेमाल किया करते थे। बेशक इन चीजों में मसाला पीसने में मेहनत और समय दोनों खर्च होते थे लेकिन खाने का जो स्वाद आता था, यब बात आपके परिजन अच्छी तरह जानते होंगे। आजकल लोगों...

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साधू को गोली मारने में तीन सगे भाइयों सहित चार पर मुकदमा, दो गिरफ्तार

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Posted on : 09-03-2017 | By : JNI-Desk | In : CRIME, FARRUKHABAD NEWS, POLICE

फर्रुखाबाद: बीती रात कोतवाली फतेहगढ़ क्षेत्र के सिविल लाइन मढैयां स्थित स्वामी संतदास आश्रम के महंत 65 वर्षीय के एन पाण्डेय उर्फ गुरुचरन दास को गोली मारने के मामले में पुलिस ने तीन सगे भाइयों सहित चार पर मुकदमा दर्ज कर दो को गिरफ्तार कर लिया। घटना के बाद घायल साधु को लोहिया अस्पताल लाया गया था। जहां उसके घुटने में गोली लगी होने के कारण हालत खराब हो गयी थी। डाक्टर ने उन्हें रिफर कर दिया था। जिसके बाद घायल सधु गुरुचरनदास को नेकपुर स्थित ग्लोबल हास्पिटल में भर्ती किया गया था।

घटना के सम्बंध में राजीव सेंगर पुत्र अनिरुद्व सिंह निवासी फतेहगढ़ ने कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी। जिसमें राजीव सेंगर ने कहा है कि वह रात करीब 8 बजकर 45 मिनट पर फतेहगढ़ बाजार से गुरुचरनदास के साथ स्कूटी से जा रहे थे। तभी आश्रम के निकट पहुंचने पर सुधीर कुमार, गुड्डू उर्फ सुशील, संजेश उर्फ संजीव पुत्र लालाराम निवासी सिविल लाइन मढैंया, रघुवीर पुत्र खम्मन निवासी शीशम बाग ने स्कूटी को रोककर धक्का दे दिया व बाबा गुरुचरन दास को लाठी डन्डों से मारते हुए कहा कि मुकदमें में पैरवी करते हो। जब अपने को दोनो छुड़ाकर भागने लगे तभी सुधीर व गुड्डू, सुधीर व संजेश ने तमंचों से जान से मारने की नियत से फायर कर दिया। जिससे साधु गंभीर रूप से घायल हो गये।

पुलिस ने तहरीर के आधार पर सुधीर, गुड्डू, संजेश व रघुवीर के खिलाफ धारा 307, 323, 304, 506 व 7 क्रिमनल लाॅ एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया। जांच कोतवाल अनूप कुमार निगम को दी गयी है। पुलिस ने संजेश व रघुवीर को गिरफ्तार भी कर लिया| फतेहगढ़ कोतवाल अनूप कुमार निगम ने बताया कि मामले में आरोपियों की तलाश की जा रही है। दो को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है अन्य आरोपियों की भी जल्द गिरफ्तारी की जायेगी।

हत्या में पुलिस के हाथ लगे अहम सुराग

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Posted on : 09-03-2017 | By : JNI-Desk | In : CRIME, FARRUKHABAD NEWS, POLICE

फर्रुखाबाद: बीते मंगलवार की रात गला दबाकर मौत की घाट उतारे गये रंजीत राजपूत निवासी बिलावलपुर मढैयां की हत्या में पुलिस को अहम सुराग हाथ लगे हैं। हालांकि पुलिस अभी किसी भी तरह की वयानबाजी से बच रही है।

मृतक के छोटे भाई राजीव ने गांव के ही नीरज व बबलू पर हत्या का शक जाहिर करते हुए पुलिस को तहरीर दी थी कि बबलू व नीरज रंजीत को घर से बुला ले गये और उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने घटना के दिन ही कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। मृतक के भाई राजीव व उसका दोस्त रमाकांत भी पुलिस के पूछताछ में शामिल किया गया। पुलिस के सूत्रों की मानें तो उसकी हत्या में बहुत ही करीबी व्यक्ति का हाथ होने की आशंका है। हिरासत में बैठे लोगों को पुलिस ने आला अधिकारियों के सामने पेश भी किया। सूत्रों की मानें तो पुलिस खुलासे के बिलकुल करीब में है और करीबियों पर शिकंजा कसना भी तय माना जा रहा है।

थाना प्रभारी संजीव राठौर ने बताया कि अभी जांच जारी है। पुलिस पूछताछ में जुटी है। अभी कुछ कहना संभव नहीं। जल्द खुलासा किया जायेगा।

आग से जली शिक्षिका की उपचार के दौरान मौत

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Posted on : 09-03-2017 | By : JNI-Desk | In : CRIME, FARRUKHABAD NEWS, POLICE

फर्रुखाबाद: बीते 4 मार्च को घरेलू विवाद के चलते आग से जली सहायक अध्यापक पद पर तैनात 35 वर्षीय शिक्षिका लक्ष्मी पत्नी अमित प्रताप उर्फ पिंटू यादव निवासी तलैया काजल कायमगंज की उपचार के दौरान मौत हो गयी। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया।

4 मार्च को आग से झुलसी लक्ष्मी को सीएचसी में भर्ती कराने के बाद आवास विकास स्थित एक निजी नर्सिंगहोम में भर्ती किया गया था। 5 दिन तक मौत से लड़ी शिक्षिका ने आखिर गुरुवार को मौत से हार मान ली। मौके पर पहुंचे लक्ष्मी के भाई संजीव यादव ने बहनोई अमित, लक्ष्मी के ससुर रामाधार सिंह , सास प्रभाकुमारी, देवर पुनीत उर्फ पिंटू, देवरानी सपना के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। घटना की सूचना मिलने पर आवास विकास चैकी इंचार्ज दिनेश कुमार ने मौके पर पहुंचकर शव का पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन व फर्रुखाबादी आलू

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Posted on : 09-03-2017 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, Politics, सामाजिक

फर्रुखाबाद: 7 मार्च को शहर की सातनपुर स्थित आलू मण्डी से रवाना हुई आलू किसान बचाओ यात्रा राजभवन लखनऊ पहुंची और राज्यपाल रामनाईक को किसानों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा। राज्यपाल ने आलू किसानों की समस्या पर चिंता व्यक्त की है।

किसान नेता अशोक कटियार व सुधीर शुक्ला आदि के नेतृत्व में यात्रा के सदस्यों ने राज्यपाल रामनाइक से भेंट की। राज्यपाल रामनाइक ने किसानों की समस्या पर चिंता प्रकट की। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि किसानों के हित में सही कदम उठाकर राहत पहुंचायी जाये। राज्यपाल ने आलू किसान बचाओ यात्रा के सदस्यों से कहा कि नई सरकार बनने के बाद वह सबसे पहले आलू किसानों की समस्या का समाधान ढूढेंगे। यात्रा में गये सदस्यों ने राज्यपाल को फर्रुखाबादी आलू भी सौंपा। राज्यपाल ने विलुप्त होती जा रही आलू की फुलवा किस्म पर चर्चा की। आलू निर्यात संघ के अध्यक्ष सुधीर शुक्ला ने आलू की किस्मों से राज्यपाल को अवगत कराया।

इस दौरान अरविंद राजपूत, कुंवरजीत प्रधान, संजय कटियार, अखिलेश अवस्थी, रामबाबू दुबे, उमलेश यादव आदि मौजूद रहे।

राहुल-अखिलेश-शाह, अगर यूपी हारे तो क्या होगा इनका भविष्य?

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के हाई प्रेशर चुनाव के सातवें चरण की वोटिंग पूरी हो चुकी है. नतीजे 11 मार्च को आएंगे. इस बीच सभी राजनीतिक दलों के हाई-प्रोफाइल चेहरों को बीते 6 महीने से जारी जी तोड़ मेहनत से छुट्टी मिल गई है. इसमें अखिलेश यादव, राहुल गांधी, अमित शाह, शामिल हैं. इनमें से किसी एक या दो नेता के हाथ में उत्तर प्रदेश की कमान जाने वाली है. वहीं बाकी नेताओं को हार के चलते किसी और काम में अपने आप को व्यस्त करने की जरूरत पड़ेगी, खासतौर पर 2019 के आम चुनावों को देखते हुए हारने वाले नेताओं को नए सिरे से अपनी रणनीति तैयार करनी होगी.
अखिलेश यादव
चुनाव हारते ही अखिलेश यादव सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री हो जाएंगे. नए मुख्यमंत्री को सत्ता हस्तांतरण करने और मुख्यमंत्री आवास खाली करने के बाद हार के कारणों को समझने के लिए लंबा वक्त मिल जाएगा. प्रदेश में अगला चुनावी बिगुल 2019 में आम चुनावों के लिए बजेगा. तब तक अखिलेश को समाजवादी पार्टी से चुनौती का सामना करना पड़ेगा. मौजूदा समय में पार्टी के राष्ट्रीय ढ़ांचे की कमान उनके हाथ में है लेकिन चुनावों में हार मिलने के बाद उन्हें इस कुर्सी को बचाने की लंबी कवायद करनी होगी. चाचा शिवपाल और पिता मुलायम उनके पर कतरने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे. वहीं कांग्रेस के रूप में मिला पार्टनर भी संसद में अस्तित्वहीन होने के कारण किसी तरह की मदद देने में कारगर नहीं रहेगी.
राहुल गांधी
एक दशक से लंबे समय से राजनीति में सक्रिय राहुल गांधी को लगातार उत्तर प्रदेश में मुंह की खानी पड़ रही है. कभी कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ रहा प्रदेश एक-एक कर राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़े गए सभी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में नकार चुका है. पार्टी के सूत्रों का भरोसा था कि इस बार उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव लड़ने पर कांग्रेस को अधिक सीटों को जीतने का मौका मिलेगा जिसके बाद उन्हें आसानी से पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया जाएगा. लेकिन 11 मार्च को वोटों की गिनती में एक बार फिर मुंह की खाने के बाद राहुल गांधी को कवायद पार्टी में अपनी पकड़ मजबूत करने की करनी होगी. वहीं बिना किसी बड़ी जीत पर सवार हुए अध्यक्ष बनने की स्थिति में राहुल को 2019 के आम चुनावों के लिए अपनी नई रणनीति खोजनी होगी. पहले बीजेपी, फिर बिहार में जेडीयू के लिए करिश्मा करने वाले प्रशांत किशोर विफल हो जाएंगे और इसका जवाब भी राहुल गांधी को तैयार करना होगा.
अमित शाह
2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की जीत का ताज पार्टी अध्यक्ष बनाकर अमित शाह के सिर पर रख दिया गया था. इस ताज के लिए 2014 में यदि बीजेपी को 80 सीट मिलना जिम्मेदार है तो 2017 के विधानसभा चुनावों में हार इस ताज पर सवाल खड़ा कर देगी. अमित शाह को जवाब देना होगा कि आखिर क्यों वह 2014 वाला करिश्मा 2017 में नहीं दोहरा पाए? इसके अलावा उन्हें पार्टी को यह भी समझाना होगा कि हार के बावजूद 2019 के आम चुनावों लिए क्यों कमान उनके ही हाथ में रहनी चाहिए.

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