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जेएनआई विशेष: कुम्भ में बढ़ी फतेहगढ़ सेन्ट्रल जेल के भगवा झोलों की डिमांडजेएनआई विशेष: कुम्भ में बढ़ी फतेहगढ़ सेन्ट्रल जेल के भगवा झोलों... फर्रुखाबाद:(दीपक-शुक्ला)सेन्ट्रल जेल फतेहगढ़ में बनने वाले झोले आदि सामान तो वैसे भी मजबूती के मामले में बेजोड़ माना जाता है| लेकिन आम जनमानस में इसकी खरीददारी को लेकर साधन उपलब्ध नही है| लेकिन इसके बाद भी उसको खरीदने की चाहत लोगों के जगन में रहती है| अब कारोबार कम है लेकिन...

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महिलाओं का प्रतिशत कम देख नोडल अधिकारी खफामहिलाओं का प्रतिशत कम देख नोडल अधिकारी खफा फर्रुखाबाद: अपने निरीक्षण में महिलाओं की संख्या गाँव के पुरूषों से काफी कम देख नोडल अधिकारी खफा हो गये| उन्होंने कहा की सरकार बेटी-बचाओं और बेटी पढाओ पर अपना पूरा जोर दे रही है| लेकिन इस गाँव में पुरुष वर्ग की अपेक्षा महिलाओं का प्रतिशत चिंता का विषय है| उन्होंने अधिकारियों...

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कोटेदारों का खाद्यान्न उठाने से साफ़ इंकारकोटेदारों का खाद्यान्न उठाने से साफ़ इंकार फर्रुखाबाद:अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे जिले के कोटेदारों ने अब राशन उठान ने मना कर आन्दोलन की राह पकड़ ली है| जिसके चलते कोतेदारों ने साफ़ कह दिया की जब तक उनकी मांगो पर विचार नही होगा तब तक वह राशन नही उठायेंगे| नगर के ग्राम चाँदपुर में आयोजित हुई उचितदर विक्रेताओं...

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छुट्टा गोवंश के भरण-पोषण को 78.5 करोड़ की मंजूरीछुट्टा गोवंश के भरण-पोषण को 78.5 करोड़ की मंजूरी लखनऊ:छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए चरागाह की जमीनों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए ग्राम सभा की भूमि प्रबंधक समिति किसी गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) या कॉरपोरेट घराने से अनुबंध कर सकती है। वहीं पशु आश्रय स्थलों की स्थापना चरागाह की जमीन से हटकर अनारक्षित श्रेणी की भूमि...

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सामूहिक बलात्कार के बाद तीन दरिंदों ने उतारा था गोल्डी को मौत के घाटसामूहिक बलात्कार के बाद तीन दरिंदों ने उतारा था गोल्डी को... फर्रुखाबाद:(अमृतपुर)बीते दिन खेत में दुष्कर्म के बाद हत्या किये जाने की घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी थी| घटना के बाद से एसपी ने क्षेत्र में डेरा जमा लिया था| 24 घंटे के भीतर घटना करने के आरोपियों में से दो को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया| जबकि एक फरार आरोपी पर ईनाम भी रखा...

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खास खबर:यह शख्स रोज करता परिंदों की मेहमान नवाजीखास खबर:यह शख्स रोज करता परिंदों की मेहमान नवाजी फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला)ऋषि-मुनि, संत-महात्मा सही कह गए हैं कि पशु-पक्षियों को दाना-पानी खिलाने से मनुष्य के ज‍ीवन में आने वाली कई परेशानियों से छुटकारा बड़ी ही आसानी से मिल जाता है। एक ओर ईश्वर की भक्ति के कृपा पात्र बनते हैं वहीं हमें अच्छे स्वास्थ्य के साथ ही पुण्य-लाभ...

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मिक्सी ने मिस कर दिया सिल-बट्टा के मसालों का स्वादमिक्सी ने मिस कर दिया सिल-बट्टा के मसालों का स्वाद फर्रुखाबाद:(दीपक-शुक्ला)पुराने समय में खाना पकाने के लिए मसाले पीसने के लिए ओखली-मूसल और सिल बट्टा का इस्तेमाल किया करते थे। बेशक इन चीजों में मसाला पीसने में मेहनत और समय दोनों खर्च होते थे लेकिन खाने का जो स्वाद आता था, यब बात आपके परिजन अच्छी तरह जानते होंगे। आजकल लोगों...

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माटी के चूल्हों से रामनगरिया में रोजगार तलाश रही इंद्रामाटी के चूल्हों से रामनगरिया में रोजगार तलाश रही इंद्रा फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला)चूल्हे की रोटी का स्वाद जिसने चख रखा हो, उसे मिट्टी की हांडी का बदल अच्छा नहीं लगता। मुझे बैलगाड़ी में बैठाकर गांव ले चलिए, घुटन होती है कारों में महल अच्छा नहीं लगता। यह कुछ लाइनें नाम चीन शायर अशोक साहिल की है| यह वेदना उस धुन की पक्की महिला को देखकर...

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महिला सम्मेलन में बेटियों के लिंगानुपात में आयी गिरावट पर चिंता

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Posted on : 25-12-2015 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, जिला प्रशासन, सामाजिक

archna rathaurफर्रुखाबाद: फर्रुखाबाद महोत्सव में महिला सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि श्रीमती अर्चना राठौर सदस्य, राज्य महिला आयोग ने महिलाओं को जागरुक करते हुए कहा कि वह अधिकारों की लड़ाई लड़े लेकिन दायित्वों का निर्वाहन भी जिम्मेदारी पूर्वक करें। उन्होंने बेटियों के लिंगानुपात में आयी गिरावट पर गहरी चिन्ता जतायी और भ्रूण हत्या जैसे जघण्य अपराध के लिए महिलाओं को ही दोषी करार दिया।

महिला आयोग की सदस्य ने कहा, प्रदेश में बेटों की तुलना में बेटियों की संख्या में भारी गिरावट आयी है। जो देश और समाज के लिए हितकर नही है। महिलाएं यदि भ्रूण हत्या में सहयोग न करें तो कोई ताकत बेटी को जन्म लेने से नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि लिंग परीक्षण करने वाले अल्ट्रासाउण्ड केन्द्रों पर सरकार कठोर कार्यवाही कर रही है। यदि कोई अल्ट्रासाउण्ड केन्द्र भ्रूण परीक्षण करने का कार्य कर रहा है तो सीधे उसकी शिकायत राज्य महिला आयोग में करें। शिकायत के एक घण्टे के अंदर केन्द्र के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य महिला आयोग महिलाओं को जागरुक करने के लिए प्रदेश सरकार की मदद से महिला चैपाल कार्यक्रम शुरू करेगा। जिसके माध्यम से सरकार की विकास परक योजनाओं और महिलाओं के लिए शुरू किए गए कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी उन तक पहुंचायी जाएगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. पुष्पा सूद ने की।

महिला सम्मेलन में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी इन्दू सक्सेना, चित्रा डिग्री कालेज कानपुर की प्राचार्या ममता श्रीवास्तव व अरमापुर डिग्री कालेज के प्राचार्य जीएल श्रीवास्तव की विशिष्ठ उपस्थिति रही। सम्मेलन को बीके माधुरी बहन सर्च लाइट भवन बीबीगंज, भारती मिश्रा, पुष्पा सिंह, इन्द्रा राठौर, सुलक्षणा सिंह, रमला राठौर कामिनी कौशल, सुनीता गुप्ता ने भी संबोधित किया। सम्मेलन का संचालन दीपिका त्रिपाठी ने किया। पूर्व विधायिका उर्मिला राजपूत, जमुर्रद बेगम, डा. नीतू सिंह सेंगर, नीलम सिंह, राजवती बाथम आदि मौजूद रहीं। सम्मेलन के मध्य में छात्र-छात्राओं ने गीत-संगीत पर नृत्य की मन-मोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को बांधे रखा।

नृत्य व फेंसी ड्रैस प्रतियोगिता का परिणामः
फर्रुखाबाद महोत्सव में पूर्वाहन 10 बजे नृत्य व फेंसी ड्रेस प्रतियोगिता का अयोजन किया गया। जिसकी निर्णायक कामिनी कौशल व चमन शुक्ला रहीं। जूनियर वर्ग की नृत्य प्रतियोगिता में प्रत्युज मिश्रा को विशेष पुरस्कार दिया गया। जबकि जाहन्वी वर्मा व अपराजिता चतुर्वेदी प्रथम, प्रशन्न प्रताप सिंह व संजना शुक्ला द्वितीय, आशीष बाथम, अनुष्का मिश्रा व दृष्टि वर्मा तृतीय स्थान पर रहे। सीनियर गर्व में अनुराग प्रथम, विक्रान्त द्वितीय, विशाल व नूरन सामूहिक रूप से तृतीय स्थान पर रहे। अंकित कुमार को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। वहीं फेंसी ड्रैस प्रतियोगिता में जाहन्वी वर्मा प्रथम व दृष्टि वर्मा द्वितीय स्थान पर रहीं।

बरेली की देवा पार्टी बनी विजेताः
दिनाॅक 24 दिसम्बर की रात्रि में महोत्सव में आयोजित हुयी देवी जागरण प्रतिष्पर्धा में बरेली की देवा पार्टी व फर्रुखाबाद की भानुप्रकाश पार्टी के मध्य कड़ जवाबी मुकाबला हुआ। लेकिन भानुप्रकाश पार्टी, देवा पार्टी के मुकाबले कमजोर साबित हुयी। देवा पार्टी ने जोरदार संगीत

ब्रेकिंग: मुख्यमंत्री का बड़ा एक्शन, डॉ सुबोध यादव सहित तीन नेता पार्टी से बर्खास्त

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Posted on : 25-12-2015 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics- Sapaa

subodh yadav, akhileshलखनऊ: समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के गुरुवार को बड़ा एक्शन लिया| उन्होंने ने पार्टी के चार नेताओ को बर्खास्त कर दिया है| इसके साथ ही साथ कई को चेतावनी भी दी गयी है|

समाजवादी पार्टी ने बड़ा फैसला लेते हुये सपा नेता सुनील यादव साजन,अलीगंज के सपा विधायक रामेश्वर यादव के पुत्र सुबोध यादव और आनंद भदौरिया को सपा ने पार्टी से बर्खास्त, जबकि कैबिनेट मंत्री पंडित सिंह को कड़ी चेतावनी देकर छोड़ा गया है| सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ जनपद के कई और दिग्गज सपा नेताओ को कड़ी फटकार के साथ चेतावनी भी दी गयी है|

जेल में बंद कैदियों की बल्ले-बल्ले, अब जेल से होगी फोन पर बात

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Posted on : 25-12-2015 | By : JNI-Desk | In : CRIME, JAIL

jail-cellलखनऊ: यूपी के जेलों में बंद कैदियों को सपा सरकार अब एक सौगात देने जा रही है. जेलों में कैदी अब अपने परिजनों से टेलीफोन पर बात कर सकेंगे.प्रदेश के जेल मंत्री बलवन्त सिंह रामूवालिया के इस प्रस्ताव को अखिलेश सरकार ने हरी झंडी दे दी है. अब जल्द ही कैदी अपने घर बातकर घरवालों से हालचाल पूछ सकेंगे.

बलवन्त सिंह रामूवालिया ने कहा कि सपा सरकार जेलों की तस्वीर बदल रही है. जेलों में जो कैदी होते हैं उन्हें सुधरने का मौका देना भी जरूरी है, इसलिए जेलों को सुधारगृह की तरह बनाया जा रहा. नई जेलों का निर्माण कराने की योजना है| कैदियों को अपने बीबी बच्चों से जेल के फोन से बात भी कराई जाएगी. इसके लिए ये जरूरी है कि कैदी के घर पोस्टपेड मोबाइल कनेक्शन होना चाहिए. इस नई योजना को जल्द ही शुरू किया जाएगा.रामूवालिया ने कहा कि सपा मुखिया और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस योजना को जेल में लागू करने को हामी भर दी है| जेल स्टाफ बात कराते वक्त वहां मौजूद रहेगा| कॉल पर नजर रखने की भी व्यवस्था की जा रही है. जेलों में कैदियों से मुलाकात के दिन भी बढ़ाए जा रहे. दो की जगह अब तीन दिन मुलाकात कराई जाएगी.

जेल मंत्री ने कहा कैदियों के साथ जेल के अफसरों और स्टाफ की सुविधाओं का ख्याल भी रखा जा रहा है. अफसरों कर्मचारियों को अपने काम के लिए रविवार को छुट्टी मिलेगी, इसलिए मुलाकात रविवार को नहीं, बल्कि शनिवार को कराई जाएगी. जिससे जेल स्टाफ अपने घर और परिवार को वक्त दे सकें| रामूवालिया ने बताया कि सिफारिश तो जायज है पर पैसे लेकर जेल कर्मचारियों अफसरों के तबादलों का जो धब्बा विभाग पर था वो अब नहीं चलेगा. पैसे देकर लेकर कोई तबादले नहीं होंगे.

मंत्री ने ये भी कहा कि अंग्रेजों के जमाने के जेल के कानूनों को कुछ बदलाव की जरूरत है. यूपी की जेलों में अलग और पड़ोसी राज्यों में अलग कानून भी खत्म होंगे. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से कानूनी राय मांगी है| जेलों के सुधार को सपा सरकार हर कदम उठाएगी और जेलों को सुधार गृह बनाएगी. कैदियों के लिए रोजगार के कार्यक्रम चला उन्हें समाज की मुख्य धारा में जोड़ने का भी कार्यक्रम है.

राम मंदिर की वकालत पर अखिलेश ने किया अपने मंत्री को बर्खास्त

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Posted on : 25-12-2015 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics- Sapaa

ompalnehra1नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश के दर्जा प्राप्त मंत्री ओमपाल नेहरा को राम मंदिर पर बोलना महंगा पड़ गया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बयानबाजी को लेकर उन्हें बर्खास्त कर दिया है। ओमपाल नेहरा ने अयोध्या में मंदिर बनवाने के लिए मुस्लिमों से साथ आने की अपील की थी।

समाजवादी पार्टी के नेता और यूपी सरकार के दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री ओमपाल सिंह नेहरा ने कहा था हिंदू और मुसलमानों को मिलकर अयोध्या और मथुरा में कारसेवा करनी चाहिए ताकि वीएचपी का मुद्दा ही खत्म हो जाए। अखिलेश सरकार ने इस बयान पर मेहरा को बर्खास्त कर दिया है।बिजनौर में एक सभा में नेहरा ने कहा था कि अगर मुस्लिम हिंदुओं के साथ सौहार्द बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें अयोध्या, मथुरा और काशी में मस्जिद पर दावा छोड़ मंदिर बनाने में साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा था कि मुसलमानों को अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए कार सेवा करनी चाहिए।

वहीं ओमपाल ने कहा कि मैं 23 दिसंबर को एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि था। उसमें बयान दिया था जिस पर मुसे निलंबित किया गया है। कल रात DM ने निलंबन के बारे में बताया।मैंने कहा था कि बीजेपी के पास यूपी में राम मंदिर के अलावा कोई मुद्दा नहीं है इसलिए ये मुद्दा हमेशा के लिए खत्म हो जाना चाहिए। मैंने कहा था कि सेकुलर नेताओं और मुस्लिम बुद्धिजीवियों को इसके समाधान के लिए सामने आना चाहिए।

91 साल के हुए अटल, पत्रकार बनना चाहते थे, पीएम बन गए!

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Posted on : 25-12-2015 | By : JNI-Desk | In : FARRUKHABAD NEWS, Politics, Politics-BJP, राष्ट्रीय

INDIA - MARCH 25: Atal Bihari Vajpayee, Prime Minister of India (Photo by Hemant Chawla/The India Today Group/Getty Images)atal4atal6atal10नई दिल्ली: अटल बिहारी वाजपेयी एक कवि, एक पत्रकार, राजनेता और फिर देश के प्रधानमंत्री! भारतीय राजनीति की उन चुनिंदा शख्सियतों में से एक जिनके विरोधी भी उनकी आलोचना नहीं करते। ये अटल के नेतृत्व का ही कमाल था, कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए ने 23 दलों के साथ मिलकर न सिर्फ सरकार बनाई और अपना कार्यकाल भी पूरा किया। अटल आज भले ही राजनीति से दूर हों, लेकिन लोग उन्हें आज भी उतने ही सम्मान और आदर के साथ याद करते हैं। आज वे 91 साल के हो गए हैं।

ग्वालियर में हुआ था जन्म
अटल बिहारी वाजपेयी एक महान कवि, एक पत्रकार, राजनेता और देश के प्रधानमंत्री वो शख्सियत जिसकी विरोधी भी आलोचना नहीं करते थे।25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में शिंदे की छावनी की तंग गलियों में गिरिजाघर की घंटी ने जैसे ही क्रिसमस यानी 25 दिसंबर शुरू होने की घंटी बजाई तभी कमलसिंह के बाग में एक छोटे से घर में किलकारी सुनाई दी। ये किलकारी थी अटल बिहारी वाजपेयी की और ये घर था पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी का। मां कृष्णा की अटल सातवीं संतान थे। तीन बहनें, तीन भाई। अटल बिहारी वाजपेयी की संजीदगी को देखकर ये अंदाजा लगाना मुश्किल है कि उनका बचपन बेहद नटखट और शरारतों से भरा हुआ था। कमल सिंह के बाग की गलियों में अटल ने खेल खेले हैं। खेलों में जो सबसे ज्यादा पसंद था, वो था कंचे खेलना। बचपन से ही कवि सम्मेलन में जाकर कविताएं सुनना और नेताओं के भाषण सुनना और जब मौका मिले मेले में जाकर मौज मस्ती करना।

पत्रकार बनना चाहते थे अटल
अटल को बचपन से ही साहित्यकार और पत्रकार बनने की तमन्ना थी। उनकी स्कूली शिक्षा बड़नगर के गोरखी विद्यालय में हुई। बड़नगर में ही उनके पिता टीचर थे। कॉलेज की पढ़ाई के लिए अटल ने चुना ग्वालियर का विक्टोरिया कॉलेज। यहीं पढ़ते हुए चालीस के दशक की शुरूआत में अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे और भारत छोड़ो आंदोलन में जेल भी गए थे। ग्वालियर शहर में हिंदू महासभा का दबदबा था और नौजवान अटल बिहारी वाजपेयी की हिंदू तन मन हिंदू जीवन…रग रग हिंदू मेरा परिचय कविता उसी वक्त ग्वालियर शहर में मशहूर हो चुकी थी।उस दौर के लोग बताते हैं कि अटल बिहारी आइने के सामने खड़े होकर अपनी स्पीच का रिहर्सल किया करते थे। वाजपेयी ने इसी कॉलेज से बीए किया। हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में डिस्टिंक्शन के साथ। इस कॉलेज की वाद विवाद प्रतियोगिताओं के अटल बिहारी वाजपेयी हीरो हुआ करते थे। विक्टोरिया कॉलेज का हीरो आगे चलकर हिंदुस्तान का हीरो बन गया।

पत्रकारिता में करियर शुरु किया
पढ़ाई पूरी करने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने पत्रकारिता में अपना करियर शुरू किया, उन्होंने राष्ट्र धर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन का संपादन किया। 1951 में वो भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य बने। अपनी कुशल वाक शैली से राजनीति के शुरुआती दिनों में ही उन्होंने रंग जमाना शुरु कर दिया।

1957 में लड़ा पहला चुनाव
1957 में जन संघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया। लखनऊ में वो चुनाव हार गए, मथुरा में उनकी जमानत जब्त हो गई, लेकिन बलरामपुर से चुनाव जीतकर 33 साल की उम्र में पहली बार लोकसभा में पहुंचे। लोकसभा में उनका भाषण सुनकर खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने कहा था कि ये शख्स एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा।
इमरजेंसी में गए जेल
अटल बिहारी वाजपेयी 1968 से 1973 तक भारतीय जन संघ के अध्यक्ष रहे। आपातकाल के दौरान उन्हें भी जेल भेजा गया। 1977 में जब कांग्रेस बुरी तरह हारी तो जनता पार्टी सरकार में उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया, जिसे आज भी लोग याद करते हैं।

1980 में बीजेपी का गठन

1980 में भारतीय जनता पार्टी अस्तित्व में आई और वाजपेयी पार्टी के अध्यक्ष बने। 1980 से 1986 तक वो बीजेपी के अध्यक्ष रहे और इस दौरान वो बीजेपी संसदीय दल के नेता भी रहे। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति की ऐसी लहर उठी कि कांग्रेस को भारी बहुमत मिला और बीजेपी इस लहर में बह गई, जिसे सिर्फ दो सीटें मिलीं।
1984 में हुई करारी कार

बीजेपी के लिए ये बेहद बुरा दौर था। हालत ये थी कि वाजपेयी खुद ग्वालियर से चुनाव हार गए। उन्हें माधव राव सिंधिया ने हराया। घर में हुई हार से वाजपेयी काफी विचलित हुए।1984 की हार के बाद बीजेपी ने नया मोड़ लेना शुरु किया। 90 के दशक का शुरुआती साल वाजपेयी के लिए काफी अहम था। आरएसएस की अगुवाई में विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर आंदोलन छेड़ दिया और बीजेपी भी इससे जुड़ गई।

बीजेपी ने लिया राम का सहारा

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी रथ पर सवार होकर सोमनाथ से अयोध्या के लिए निकल पड़े। उदारवादी कहे जाने वाले वाजपेयी के सामने बड़ी चुनौती थी। 6 दिसंबर 1992 को लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती की मौजूदगी में बाबरी मस्जिद गिरा दी गई। वाजपेयी उस वक्त अयोध्या में मौजूद नही थे इस घटना पर उन्होंने दुख जताया।

1992 का वो दौर था, जिसने देश की राजनीति को सेकुलर और कम्युनल में बांट दिया। बीजेपी को इसका फायदा भी मिला और उसकी सीटें भी बढ़ने लगीं। इस दौरान बीजेपी पर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप भी लगा, दूसरी तरफ राम रथ पर सवार बीजेपी की लोकप्रियता भी बढ़ रही थी। उसी दौरान मुंबई के पार्टी अधिवेशन में लाल कृष्ण आडवाणी ने घोषणा की कि बीजेपी की तरफ से अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे।

जब अटल 13 दिन के लिए पीएम बने

16 मई 1996 को पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा। इसके बाद 1998 तक वो लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे। 1998 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने पुराने अनुभवों से सीखा और सहयोगी पार्टियों के साथ मैदान में उतरी और एनडीए का गठन हुआ। लोकसभा में अपने गठबंधन का बहुमत सिद्ध किया और इस तरह अटल एक बार फिर प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री बनते ही अटल ने पोखरण परमाणु परिक्षण करके पूरी दुनिया को अपनी ताकत दिखा दी। 1999 में एक बार फिर वाजपेयी संकट से जूझे और जयललिता का पार्टी एआईएडीएमके ने समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई।
1999 में तीसरी बार बने प्रधानमंत्री

1999 में फिर चुनाव हुआ और अटल बिहारी वाजपेयी एक बार फिर प्रधानमंत्री बने। वाजपेयी के नेतृत्व में देश की पहली ऐसी गैरकांग्रेसी सरकार बनी जो अपना कार्यकाल पूरा कर पाई। उस दौर में बीजेपी में अटल के सामने हर नेता बौना लगने लगा। बीजेपी में जिसने भी वाजपेयी का विरोध किया वो या तो पार्टी से बाहर चला गया या हाशिए पर चला गया। बाबरी मस्जिद कांड के बाद कल्याण सिंह हीरो बनकर उभरे थे, लेकिन अटल के खिलाफ दिए बयान के बाद पार्टी ने उनको किनारे कर दिया। गोविंदाचार्य भी पार्टी में बड़े चेहरे माने जाते थे, लेकिन एक बार उन्होंने वाजपेयी को पार्टी का मुखौटा कह दिया और वो भी हाशिये पर चले गए।

अटल की उदारवादी छवि के सभी कायल

अटल बिहारी के आसपास ऐसे लोगों का जमावड़ा था, जो आरएसएस को नहीं भाते थे, जसवंत सिंह, ब्रजेश मिश्रा, यशवंत सिन्हा ये सब अटल के करीबी माने जाते थे, लेकिन संघ इन्हें पसंद नहीं करता था। संघ आडवाणी को आगे लाना चाहता था। कट्टर हिंदूवादी पार्टी में रहकर भी ये अटल का अंदाज था कि उन्होंने अपनी सेकुलर छवि बनाए रखी। संघ के स्वयंसेवक रह चुके अटल उसके अंध भक्त नहीं थे, यही खासियत उनको दूसरों से अलग करती थी। दूसरी पार्टी के नेता भी उनकी प्रशंसा से नहीं चूकते थे, उनकी उदारता के सभी कायल थे।

2004 में हुई बीजेपी की करार हार!

2004 में इंडिया शाइनिंग के नारे के साथ बीजेपी एक बार फिर चुनावी समर में कूदी। बीजेपी के सभी बड़े कद्दावर नेता इस बात से आश्वस्त थे, कि एक बार फिर एनडीए की सरकार बनेगी। तमाम बुद्धिजिवी और मीडिया यही मान कर चल रही थी कि वाजपेयी की नेतृत्व में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनेगी, लेकिन कहा जाता है कि अटल को पहले से ही आभास हो गया था कि वो चुनाव हार रहे हैं, तभी उन्होंने खुद एक पत्रकार से पूछा था कि हम क्यों हार रहे हैं। और आखिर ये सच ही साबित हुआ 2004 में बीजेपी की हार हुई।आज अटल बिहारी मौन हैं, नियति ने उनके साथ ऐसा मजाक किया कि जिस व्यक्ति की आवाज की सारी दुनिया कायल थी। उस आवाज ने ही उनका साथ छोड़ दिया। वो कई सालों से बीमार हैं और बिस्तर पर पड़े हैं, सिर्फ इशारों इशारों में बात करते हैं।

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