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कर्ज लेकर घी पिलाने को तैयार अखिलेश सरकार

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JNI NEWS : 07-04-2012 | By : पंकज दीक्षित | In : EDITORIALS

लखनऊ: जाने माने अर्थशास्त्री का कथन की वर्तमान में जिओ भविष्य की चिंता मत करो, कर्ज लो और घी पियो को अखिलेश यादव साकार करने जा रहे है| उम्मीद की साइकिल को दौडाने के लिए अखिलेश सरकार महगी ब्याज दरो पर बाजार से कर्जा लेगी| वादों को पूरा करने के लिए प्रदेश की जनता के सर पर तो कर्ज लादा ही जायेगा उसे चुकाने के लिए पांच साल बाद वाली सरकार को भी इस कर्ज का सरदर्द मिलेगा| राज्य के प्रस्तावित व भविष्य के विकास कार्यों की आवश्यकता को पूरा करने के लिए सपा सरकार ने 830 करोड़ का कर्ज बाजार से लिया है। सपा सरकार ने बाजार से ये कर्ज बढ़ी हुई दर पर लिया। आपको बता दें बीते वित्तीय वर्ष जब प्रदेश में मायावती के नेतृत्व वाली बसपा सरकार थी तब भी सरकार को अपनी ज़रूरतों के लिए बाजार पर निर्भर रहना पड़ा था। वहीँ इस बार रिजर्व बैंक के सहयोग से सपा सरकार ने 9.26 प्रतिशत ब्याज दर से बाजार से कर्जा लिया है।

वित्तीय वर्ष 2011-12 में सरकार की हैसियत 18800 करोड़ का कर्ज लेने की थी लेकिन बेतहाशा बढ़ी हुई बाजार दर के कारण उसने 15,830 करोड़ का कर्ज ही लिया। वहीँ, इस बार मौजूदा सरकार 20 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने का मन बना रही है। फ़िलहाल सरकार कर्जे का कलेंडर बनवाने में लगी है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार के कोष में सपा के चुनावी घोषणा पत्र को लागू करने लायक धनराशी नहीं है| अखिलेश की इमेज बनवाने के लिए पैसे की दरकार है और पैसा राजस्व कोष में है नहीं, इसलिए अब बाजार कर्ज का उपयोग किया जायेगा और कर्ज के घी से किसानों को सस्ती खाद, बिजली, पानी, बीज व अन्य सहूलियतों को मुहैया कराया जायेगा।

कर्जे के ब्याज का भुगतान वर्ष में में दो बार किया जाएगा। सरकार को नए वित्तीय वर्ष के लिए 20 हजार करोड़ रुपये बाजार में मौजूद वित्तीय संस्थाओं से जुटाने हैं। वित्त विभाग के हमारे सूत्रों के अनुसार सपा सरकार ने यह कर्ज आगामी दस वर्षो के लिए लिया है। जिसमे से 5 वर्षो की किश्त सपा सरकार अदा करेगी और बाकि की अगली सरकार के मत्थे मढ़ जाएगी| फ़िलहाल देखना ये होगा कि सपा सरकार कब तक उधार का घी लेकर घर रौशन करती है|

विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार अपने कार्यकाल में जितना भत्ता व अन्य चुनावी घोषणा पर खर्च करने वाली है उससे सपा का वोट बैंक तो बढेगा लेकिन प्रदेश के विकास में इसका कोई योगदान नहीं होगा इससे बेहतर तो ये होगा कि भत्ते और अन्य पर खर्च होने वाली रकम से सरकार कोई फैक्टरी लगवा दे जिससे रोजगार भी मिलेगा और सरकार का वादा भी पूरा होगा|

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