विधानसभा चुनाव केदौरान वैध लाइसेंस धारकों के असलहे बगैर लिखित आदेश केजमा नहीं कराए जाएंगें। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यह फैसला मंगलवार को 74 याचिकाओं को मंजूर कर सुनाया।
न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की एकल पीठ ने फैसले में कहा कि अगर याचियों केपास असलहा रखने केवैध लाइसेंस हैं और इन्हें जमा करने के लिए सक्षम अधिकारी ने कोई लिखित आदेश नहीं दिया है तो उन्हें विधानसभा चुनाव के दौरान असलहे जमा करने को बाध्य नहीं किया जाएगा। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि ऐसे नागरिकों को, जो वैध लाइसेंस धारक हैं, महज विधानसभा चुनाव केआधार पर असलहा जमा करने को बाध्य नहीं किया जाएगा। हालांकि कोर्ट ने यह छूट भी दी है कि जिनके खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं या फिर जो किसी क्रिमिनल केस में वांछित हैं, उनके लाइसेंसी असलहे चुनाव के मद्देनजर जमा कराए जा सकते हैं। याचियों ने चुनाव केदौरान असलहों को थाने में या शस्त्र बेचने वाली दुकानों पर न जमा कराए जाने का आग्रह किया था।
Posted on : 25-01-2012 | By :
पंकज दीक्षित | In :
Election2012
मुजफ्फरनगर के खतौली में अमर सिंह की पार्टी लोकमंच के लोगों ने एक महिला नेता की पिटाई कर दी। गौरतलब है कि महिला को अमर सिंह की पार्टी ने पहले टिकट देने का ऐलान कर दिया और बाद में महिला का नाम दावेदारी से हटा दिया गया। महिला ने जब विरोध दर्ज कराना चाहा तो महिला की पिटाई की गई। महिला की पिटाई जब की गई तब अमर सिंह मौके पर भाषण दे रहे थे। महिला का नाम मेहराज जहां है। पुलिस ने शिकायत के बाद राष्ट्रीय लोकमंच पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
अमर सिंह की रैली में जब महिला मंच की तरफ विरोध जताने के लिए बढ़ी तो राष्ट्रीय लोकमंच के कार्यकर्ताओं ने उसके साथ मार पिटाई शुरू कर दी। पहले भीड़ में इस महिला के साथ धक्का-मुक्की शुरू हुई, इसके बाद भीड़ से कई लोग इस महिला पर टूट पड़े।
गौरतलब है कि अमर सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकमंच ने पहले इसे मुजफ्फरनगर की सदर सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया लेकिन बाद में इसकी टिकट कट गई। ऐसे में महिला नाराज थी। मेहराज के साथ रैली में ज्यादती हो रही थी तब अमर सिंह भाषण देने में व्यस्त थे।
मेराज जहां का कहना है कि उन्हें खेतों में एक किलोमीटर तक दौड़ाकर पीटा गया। मेराज जहां ने एसएसपी से मुलाकात कर चार लोगों के खिलाफ तहरीर दी है। अमर सिंह से जब इस घटना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि किसी महिला नेता को पीटा गया है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने नरेंद्र मोदी सरकार में साल
2002 से 2006 के दौरान हुए सभी मुठभेड़ों में लोगों की हत्याओं की जांच करने को कहा है। न्यायालय ने निगरानी प्राधिकार के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एमबी शाह से कहा कि वह तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपें।
अपने एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले निगरानी प्राधिकरण से सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में वर्ष 2002 से 2006 के बीच हुई कथित फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं के मामलों की पड़ताल करने और तीन महीने में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। गुजरात सरकार ने पिछले साल अप्रैल में शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एमएस शाह को उक्त अवधि में कथित फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं की जांच पर नजर रखने को कहा था।
न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति सीके प्रसाद की पीठ ने वर्ष 2002 से 2006 के बीच गुजरात में हुई कथित फर्जी मुठभेड़ों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि हम चाहते हैं कि जांच पूरी तरह हो ताकि प्रत्येक मामले में सचाई सामने आए। इन याचिकाओं में एक तरह से संकेत दिया गया है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को कथित रूप से आतंकवादियों के तौर पर निशाना बनाया गया।
पीठ ने कहा कि निगरानी प्राधिकरण के अध्यक्ष के पास एक स्वतंत्र टीम गठित करने की आजादी होगी, जिसमें गुजरात विशेष कार्य बल या बाहर से अधिकारी हो सकते हैं। अदालत ने कहा कि निगरानी इकाई के अध्यक्ष मुठभेड़ में मौत के किसी भी मामले में पुलिस के पूर्ववर्ती रिकार्ड या मानवाधिकार संस्थाओं के रिकार्ड मंगा सकते हैं,जिनका जिक्र रिट याचिकाओं में किया गया है।
हालांकि पीठ ने स्पष्ट किया कि निगरानी इकाई उन मामलों को नहीं देखेगी जिनकी जांच अन्य एजेंसियां शीर्ष अदालत के आदेशों पर कर रहीं हैं। पीठ ने यह भी कहा कि निगरानी प्राधिकरण के अध्यक्ष चाहें तो मामले में याचिकाकर्ताओं के या मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिजनों का पक्ष सुन सकते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार बीजी वर्गीज और गीतकार जावेद अख्तर की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही शीर्ष अदालत से गुजरात में पुलिस द्वारा इस अवधि में कथित फर्जी मुठभेड़ों में 21 लोगों की मौत के मामले में जांच की मांग की थी। उन्होंने अपनी याचिका में अक्तूबर 2002 में कथित अपराधी समीर खान की हत्या के मामले में अखबारों की खबरों तथा एक पत्रिका के स्टिंग आपरेशन का हवाला दिया। खान पुलिस हिरासत में था और 21, 22 अक्टूबर, 2002 की दरमियानी रात को उसे मार दिया गया।
Posted on : 25-01-2012 | By :
जेएनआई डेस्क | In :
CRIME
कायमगंज क्षे़त्र के जटवारा रोड स्थित रामप्रकाश यादव उर्फ कल्लू यादव की गोदाम के पास एक नवजात शिशु का शव नाले में पड़ा मिला। शव पड़े होने की जानकारी मिलते ही मौके पर भीड़ लग गयी। लोग शव डालने वाली कलयुगी मां को कोसते नजर आये।
आज सुबह जब एक नवजात शिशु का शव लोगों ने नाले में पड़ा मिला तो अनायास ही सोचना पड़ा कि यह किसी कलयुगी मां का कुकृत्य है। लोगों ने नवजात शिशु के शव को बाहर निकाला तो देखा कि शव को आज रात में किसी कलयुगी मां ने डाला है। कुछ लोगों ने एक महिला को यहां तक आते देखा था लेकिन उन्होंने यह नहीं समझा कि महिला हैवानियत पर उतारू है व एक नवजात जिंदगी को नाले में डाल रही है।
गोरखपुर : कुशीनगर में मंगलवार की शाम यूपी सरकार के एक मंत्री पर चुनाव प्रचार भारी पड गया| गांव वालों ने उन्हें दौड़ा लिया| जान बचाने के लिए मंत्री महोदय को एक घर में घुसना पड़ा| मंगलवार की शाम करीब छह बजे गांव भिसवा में पंचायती राज मंत्री व सदर विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी स्वामी प्रसाद मौर्य को समर्थकों समेत ग्रामीणों ने लाठी और झाड़ू लेकर दौड़ाया और गांव से बाहर खदेड़ दिया| मंत्री समर्थकों और ग्रामीणों में हुई जबरदस्त मारपीट में तीन ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है|
हुआ यूं कि बसपा उम्मीदवार मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य समर्थकों समेत प्रचार के लिए गांव पहुंचे ही थे कि पूर्व प्रधान शंभू राय की अगुवाई में भारी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने उन पर विकास कार्य न कराने का आरोप लगाते हुए उन्हें गांव से वापस लौट जाने को कहा| बताया जाता है कि ग्रामीणों के इस व्यवहार से गुस्साए मंत्री ने ग्रामीणों को गाली दी| सुरक्षा दस्ते के जवानों ने ग्रामीणों पर हाथ छोड़ दिया| इससे अचानक गांव का माहौल बदला| देखते-देखते ग्रामीणों व मंत्री समर्थकों में हाथापाई शुरू हो गई| बताते हैं कि यह हाल देख महिलाएं भी बाहर निकल आईं और ग्रामीणों के सहयोग में जुट गईं| भयभीत मंत्री एक घर में छिप गए. सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने हालात को काबू में कर मंत्री व समर्थकों को गांव से बाहर निकाला| गांव वाले दौड़ा रहे थे और मंत्री समर्थक भागते हुए गांव से निकल रहे थे| घटना में पूर्व प्रधान श्री राय, रवि, रूपक के घायल होने की खबर है. उन्हें अस्पताल ले जाया गया है|
पुलिस ने ग्रामीण शंभू राय की तहरीर पर मंत्री मौर्य के समर्थकों आरके, उमाशंकर, नीरज समेत दर्जन भर लोगों पर धारा 452, 323, 504, 506 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है| इस मामले को लेकर बसपा की खूब किरकिरी हो रही है. यह मामला अखबारों की सुर्खियों में आने के बाद बुधवार को स्वामी की खूब खिल्ली उडी| सुबह से ही लोग एक दूसरे से यही कहते मिले की मंतिरिया के गंउवा वाला चहेट लिहेन हैं| अब दूसरे गांव वाले भी तैयार हैं कि मंत्री का स्वागत इसी अंदाज में किया जायेगा|
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